मेरे प्यारी बेटी अनिका,
बेटी, जब हम किसी इंसान से सामने से मिलते हैं, तो हम तमीज से बात करते हैं। लेकिन इंटरनेट पर लोग अक्सर भूल जाते हैं कि, वे किसी मशीन से नहीं, बल्कि एक जीते-जागते इंसान से बात कर रहे हैं। आज की कहानी तुम्हें डिजिटल शिष्टाचार सिखाएगी। जैसे हमें अपने जीवन में शिष्टाचार अपनाना चाहिए वैसे ही इंटरनेट पर भी शिष्टाचार की आवश्यकता है।
इस कहनी की शुरूआत कुछ इस प्रकार होती है-
मीता एक लड़की जिसे गाना गाने का बहुत शौक है। उसने बड़ी हिम्मत जुटाकर अपना एक वीडियो स्कूल के ग्रुप में डाला। सबको वह गाना बहुत अच्छा लगा, लेकिन चिंटू ने बिना सोचे-समझे उसके गाने पर एक कमेंट लिख “कितना गंदा गाती हो बेसूरी कहीं की। आइंदा ऐसा वीडियो मत डालना, कान फट गए।” चिंटू जो मीता को पसंद नहीं करता था उसे लगा ऐसा लिखकर वह गर्व महसूस करेगा। मीता को नीचा दिखा पाया है। लेकिन मीता वह कमेंट पढ़कर बहुत रोई। उसने गाना गाना छोड़ दिया और अपना टैबलेट भी अलमारी में बंद कर दिया। वह बहुत उदास रहने लगी।
अनिका, अब तुम्हारी जासूसी की बारीः-
- बेटी, इस डिजिटल झगड़े को देखो और सोचो।
- क्या हमें किसी को भी ऑनलाइन उसकी भावना को ठेस पहुँचाने का अधिकार है ?
- मान लेते है कि, चिंटू ने जानबूझकर ऐसा नहीं लिखा तो क्या हम मजाक में भी ऐसा लिख सकते है ?
- अगर चिंटू को गाना पसंद नहीं भी आया था, तो क्या वह इसे और बेहतर तरीके से कह सकता था? या फिर चुप रहना ज्यादा अच्छा होता?
- अगर तुम उस ग्रुप में होती और मीता का वह वीडियो देखती, तो तुम मीता की हिम्मत बढ़ाने के लिए क्या लिखती?
- क्या हमें इंटरनेट पर होने वाले झगड़े में सामिल होना चाहिए? अगर नहीं तो क्यों ?
अनिका बेटी, इंटरनेट पर हम जो भी लिखते हैं, वह हमेशा के लिए वहाँ रह जाता है। यही वजह है कि हमें इंटरनेट पर लिखते समय और सावधान एवं सर्तक रहना चाहिए। बेवजह किसी से उलझना नहीं चाहिए और न ही बेवजह प्रतिक्रिया देनी चाहिए। इससे केवल समय का बर्बादी तो होता है ही साथ ही हमारा मूड भी खराब होता है और हम चिड़चिडे़े हो जाते है। ऑनलाइन् किसी को परेसान करने को साइबर बुलिंग कहते हैं ।
इसलिए हमेशा ध्यान रखना कुछ भी ऑनलाइन टाइप करने से पहले खुद से ये 3 सवाल पूछो-
- क्या यह सच है?
- क्या इससे किसी की मदद होगी?
- क्या यह दयालुता भरा है?
अगर तुम्हारे शब्द किसी के चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सकते, तो उन्हें टाइप न करना ही सबसे बड़ी समझदारी है।