केस स्टडी 3 :- कला या रचना जिसपर अपना अधिकार हो

मेरीे प्यारी बेटी अनिका, इंटरनेट ज्ञान का समुंद्र है जहाँ से हमे करोड़ों कहानियाँ, फोटो ,गाने और ढ़ेर सारी जानकारीयाँ प्राप्त होती है। लेकिन क्या किसी की चीज़ को याद कर लेना या उसे अपनी आवाज़ में गाना उस पर तुम्हारा अधिकार हो जाता  है। बेटी आज की कहानी में तुम कॉपीराइट और ईमानदारी के सबसे बड़े रहस्य के बारे में समझोगी।

कहानी की शुरूआत तीन दोस्त से होती है , स्कूल में  जंगल के राजा शेर पर एक प्रोजेक्ट जमा करना था। तीन बच्चों ने अलग-अलग तरीके से प्रोजेक्ट बनाना शुरू किया ।

जहाँ हमें पहले से पता है कि, तोता राम रट्टा मारने में होशियार है। तोता राम ने इंटरनेट से एक लेख पढ़ा और उसे पूरा रट लिया। उसने बिना देखे वही शब्द जैसा याद किया बिलकुल वैसा ही अपनी कॉपी में लिख दिए। उसे लगा कि उसने बिना देखे लिखा है, इसलिए यह उसका अपना लेख है। इस लेख पर उसका पूरा अधिकार है। और दूसरा दोस्त चिंटू ने दूसरे की पेंटिंग पर अपना नाम लिख दिया और उसे अपनी मेहनत बताया। जो की साफ़ तौर पर चोरी थी। सबसे अंत में एक प्यारी नन्ही परी थी। उसने पुरा लेख इंटरनेट पर पढ़ा और उसे समझा और फिर अपनी भाषा में एक नई कहानी लिखी। उसने एक मशहूर गाना भी गाया, लेकिन गाने से पहले उसने कहा यह गाना असली कंपोजर,यानि किसी और का है मैं तो इसे अपनी आवाज़ में पेश कर रही हूँ।

अनिका बेटी अब तुम्हारी जासूसी की बारी है-

  1. बेटा, इन तीनों के काम को देखकर बताओ कि कानून और ईमानदारी की नज़र में क्या सही है और क्या गलत है
  2. क्या रट्टा मारना ओरिजिनल है? तोता राम ने भले ही बिना देखे लिखा, पर शब्द तो किसी और के थे। क्या वह उस लेख का असली मालिक कहलाएगा?
  3. सिंगर बनाम मालिक परी ने गाना गाया, जो उसका अपना टैलेंट (आवाज़) है। वह उस गाने की सिंगर तो बन गई, लेकिन क्या वह उस गाने की मालिक बन गई?

अनिका बेटी, इंटरनेट की दुनिया में कॉपीराइट का मतलब है दूसरों की मेहनत का सम्मान करना। और दूसरो की मेहनत को कभी अपना नहीं बोलना। हमेशा ये तीन बातें याद रखना -

शब्द तुम्हारें अपने हों- अगर तुम किसी जानकारी को पढ़कर उसे अपनी सरल भाषा में फिर से लिखती हो तो वह तुम्हारी अपनी रचना बन जाती है। सिर्फ याद करके वैसा ही लिख देना नकल ही कहलाएगा।

अपनी प्रतिभा पहचानो-  जब तुम किसी और के लिखे शब्द अपनी आवाज़ में पढ़ती हो या गाती हो, तो तुम उसकी कलाकार तो हो, लेकिन शब्दों का क्रेडिट हमेशा मूल लेखक को ही जाएगा।

ईमानदारी का क्रेडिट-  किसी की चीज़ से प्रेरणा लेना गलत नहीं है, बस हमेशा उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिनसे तुमने वह सीखा है।






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