✏️कलम हाथ में रहती है, मैं शिक्षक धर्म निभाता हूं।
पर बेटी, तेरी आखों में मैं जीवन का पाठ पढ़ाता हूं।
पच्चिस वर्षों की सेवा का जो लक्ष्य सामने रखा है,
उस से बड़ा तेरा व्यक्तित हो, यह ख्वाब मन में रखा है।
अनिका तू वह तेज बने, जो अंधकार को चीर सके।
इनाया तू वह शक्ति बने, जो सच की राह लकीर सके।
शिक्षक पिता की सीख यही, तू विद्या से श्रृंगार करे,
पर सबसे बड़ा हुनर तेरा, की तू सच से ही प्यार करे।
तकनीक और कानून मिले, तेरे हाथों में अधिकार बने,
पर हृद्य में तेरे सदा ही, सत्य का एक आधार रहे।
तुझे विरासत में ना मिले, वह उलजन, वह वह मजबूरी,
जो अपनों के बीच ही पैदा कर देती है दूरी।
तु खरी रहे उस मोड़ पर भी, जहां रास्ता बहुत अकेला हो,
पर मन में तेरे आत्मबल का, एक बहुत बड़ा सा मेला हो।
तुझे ना विरासत में गुस्सा, ना मुख़ोटों की चालाकी दूँ,
मैं दुआ करूं की तुझे उम्र भर बस सच बोलने की आजादी दू।